श्री जसनाथ जी महाराज shree jasnath ji maharaj

श्री जसनाथजी महाराज की संक्षिप्त जीवनी
जन्म- 1482 ई.,कार्तिक शुक्ल एकादशी, कतरियासर (बीकानेर) 
पिता- हम्मीर , 
माता-रुपादे पत्नि- काललदे
बचपन का नाम- जसवंत 
गौत्र–ज्याणी (जाट)
गुरु– गोरखनाथ 
शिक्षा - 12 वर्ष की आयु में गोरखमालिया स्थान पर बाड़ी–सिंकदर लोदी ने 500 बीघा जमीन दी ।
जांभोजी से मुलाकात– 1500 ई. में बीकानेर में।
→ जसनाथजी की आराधना में अग्नि नृत्य करते हैं।
→ 24 वर्ष की आयु में बाड़ी में आश्विन शुक्ल 7 को समाधि। → बाड़ी के निकट कालल दे ने आश्विन शुक्ल 8 को समाधि ली।
→जसनाथजी ने भक्ति के स्थान पर योग पर बल दिया ।

जसनाशी संप्रदाय -
कुल नियम- 36
 स्थापना -1504, कतरियासर, बीकानेर 
पूज्य–मोर पक्षी व जाल वृक्ष 
 गले में ऊन का काला धागा बांधने का महत्व।

जसनाथ जी के अनुयायी (i) विरक्त (ii) सिद्ध (iii) जसनाथी जाट 
प्रमुख ग्रंथ (1) सिसुदड़ा (2) कोडा (3) शब्दवाणी (4) सिहूजी रो सिरलोक (5) झलम झुमरो 
मेला - आश्विन शुक्ल 7 को कतरियासर, बीकानेर जसनाथी संप्रदाय को धारण करने वाले प्रथम व्यक्ति–हिरोजी व जीयोजी।

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